NCERT Class 6 Hindi Malhar Chapter 8 Question Answer सत्रिया और बिहू नृत्य
Ncert Class 6 Hindi Malhar Chapter 7 Question Answer जलाते चलो
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“जलाते चलो” द्वारिका प्रसाद माहेश्वरी जी की प्रेरणादायक कविता है। इस कविता में कवि ने स्नेह, प्रेम और आशा के दीपक जलाते रहने का संदेश दिया है। कवि कहते हैं कि जीवन में चाहे कितना भी अँधेरा या कठिनाई हो, हमें निराश होकर रुकना नहीं चाहिए। लगातार अच्छे काम करते रहने और प्रेम का प्रकाश फैलाने से एक दिन अँधकार जरूर दूर होगा।
आइए, अब हम इस कविता से अपनी मित्रता को और घनिष्ठ बना लेते हैं। इसके लिए नीचे कुछ गतिविधियाँ दी गई हैं। हो सकता है कि इन्हें करने के लिए आप कविता को फिर से पढ़ने की आवश्यकता अनुभव करें।
मेरी समझ से
(क) नीचे दिए गए प्रश्नों का सटीक उत्तर कौन – सा है?
प्रश्न 1. निम्नलिखित में से कौन-सी बात इस कविता में मुख्य रूप से कही गई है?
• भलाई के कार्य करते रहना
• दीपावली के दीपक जलाना
• बल्ब आदि जलाकर अंधकार दूर करना
• तिमिर मिलने तक नाव चलाते रहना
उत्तर: भलाई के कार्य करते रहना
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प्रश्न 2. “जला दीप पहला तुम्हीं ने तिमिर की, चुनौती प्रथम बार स्वीकार की थी”
यह वाक्य किससे कहा गया है?
• तूफ़ान से
• मनुष्यों से
• दीपकों से
• तिमिर से
उत्तर: मनुष्यों से
(ख) अब अपने मित्रों के साथ चर्चा कीजिए और कारण बताइए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुने?
मैंने ये उत्तर इसलिए चुने क्योंकि वे कविता में दिए गए भाव और विचारों से जुड़े हुए हैं। मित्रों के साथ चर्चा करने से हमें अपने उत्तर का कारण समझने और दूसरों के विचार जानने का मौका मिलता है। इससे हम अपनी बात तर्क के साथ कहना और दूसरों की राय का सम्मान करना सीखते हैं।
मिलकर करें मिलान
कविता में से चुनकर कुछ शब्द यहाँ दिए गए हैं। अपने समूह में इन पर चर्चा कीजिए और इन्हें इनके सही अर्थों या संदर्भों से मिलाइए। इसके लिए आप शब्दकोश, इंटरनेट या अपने शिक्षकों की सहायता ले सकते हैं।
पंक्तियों पर चर्चा
कविता में से चुनकर कुछ पंक्तियाँ नीचे दी गई हैं। इन्हें ध्यान से पढ़िए और इन पर विचार कीजिए। आपको इनका क्या अर्थ समझ में आया? अपने विचार अपने समूह में साझा कीजिए और अपनी लेखन पुस्तिका में लिखिए-
कवि का संदेश है कि हमें मुश्किलों और संघर्षों से घबराना नहीं चाहिए। हमें हमेशा आगे बढ़ते रहना चाहिए और निराश नहीं होना चाहिए। एक छोटा-सा दीपक भी अँधेरे को दूर कर सकता है। इसी तरह प्रेम, ज्ञान और अच्छे कामों से दुनिया में रोशनी और खुशियाँ फैलाई जा सकती हैं।
सोच-विचार के लिए
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कविता को एक बार फिर से पढ़िए, पता लगाइए और अपनी लेखन पुस्तिका में लिखिए—
(क) कविता में अँधेरे या तिमिर के लिए किन वस्तुओं के उदाहरण दिए गए हैं?
कविता में अँधेरे या तिमिर के लिए कई उदाहरण दिए गए हैं, जैसे अमावस, निशा, तिमिर की सरिता, तिमिर की शिला और तूफ़ान। ये सभी अँधेरे और कठिन परिस्थितियों को दर्शाते हैं।
(ख) यह कविता आशा और उत्साह जगाने वाली कविता है। इसमें क्या आशा की गई है? यह आशा क्यों की गई है?
यह कविता हमें प्रेम, अपनापन और अच्छे विचारों का प्रकाश फैलाने की सीख देती है। हमें कठिन समय में भी निराश नहीं होना चाहिए और उम्मीद बनाए रखनी चाहिए। हमें महान लोगों से प्रेरणा लेकर दूसरों की भलाई, प्रेम और भाईचारे के लिए काम करना चाहिए। इससे समाज और दुनिया में सुख-शांति बढ़ेगी और आने वाली पीढ़ी के लिए बेहतर भविष्य बनेगा।
(ग) कविता में किसे जलाने और किसे बुझाने की बात कही गई है?
कवि कहते हैं कि हमें स्नेह और आशा के दीपक जलाते रहना चाहिए, ताकि जीवन का अँधेरा दूर हो सके। बिना प्रेम और स्नेह के केवल बिजली की रोशनी से सही रास्ता नहीं मिल सकता। इसलिए हमें प्रेम, अपनापन और अच्छे विचारों का प्रकाश फैलाना चाहिए।
कविता की रचना
“जलाते चलो ये दिये स्नेह भर-भर
कभी तो धरा का अँधेरा मिटेगा ।”
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इन पंक्तियों को अपने शिक्षक के साथ मिलकर लय सहित गाने या बोलने का प्रयास कीजिए। आप हाथों से ताल भी दे सकते हैं। दोनों पंक्तियों को गाने या बोलने में समान समय लगा या अलग-अलग? आपने अवश्य ही अनुभव किया होगा कि इन पंक्तियों को बोलने या गाने में लगभग एक-समान समय लगता है। केवल इन दो पंक्तियों को ही नहीं, इस कविता की प्रत्येक पंक्ति को गाने में या बोलने में लगभग समान समय ही लगता है। इस विशेषता के कारण यह कविता और अधिक प्रभावशाली हो गई है।
आप ध्यान देंगे तो इस कविता में आपको और भी अनेक विशेष बातें दिखाई देंगी।
(क) इस कविता को एक बार फिर से पढ़िए और अपने-अपने समूह में मिलकर इस कविता की विशेषताओं की सूची बनाइए, जैसे इस कविता की पंक्तियों को 2–4, 2-4 के क्रम में बाँटा गया है आदि।
“जलाते चलो” कविता की प्रमुख विशेषताएँ इस प्रकार हैं—
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(ख) अपने समूह की सूची को कक्षा में सबके साथ साझा कीजिए।
हमने अपने समूह में कविता की विशेषताओं पर चर्चा की और जो बातें समझ में आईं, उन्हें पूरी कक्षा के साथ साझा किया। हमने बताया कि कविता में लय और गेयता है, पंक्तियाँ एक विशेष क्रम में हैं और दीपक, अँधेरा, स्नेह तथा आशा के माध्यम से सुंदर संदेश दिया गया है।
मिलान
स्तंभ 1 और स्तंभ 2 में कुछ पंक्तियाँ दी गई हैं। मिलते-जुलते भाव वाली पंक्तियों को रेखा खींचकर जोड़िए-
अनुमान या कल्पना से
अपने समूह में मिलकर चर्चा कीजिए—
(क) “दिये और तूफ़ान की यह कहानी
चली आ रही और चलती रहेगी”
दीपक और तूफ़ान की यह कौन-सी कहानी हो सकती है जो सदा से चली आ रही है?
दीपक और तूफ़ान की कहानी अच्छाई और बुराई, प्रकाश और अँधेरे के बीच संघर्ष की कहानी है। दीपक अँधेरे को दूर करने की कोशिश करता है, जबकि तूफ़ान उसे बुझाने की कोशिश करता है। यह संघर्ष हमेशा से चला आ रहा है और आगे भी चलता रहेगा।
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(ख) “जली जो प्रथम बार लौ दीप की
स्वर्ण-सी जल रही और जलती रहेगी”
दीपक की यह सोने जैसी लौ क्या हो सकती है जो अनगिनत सालों से जल रही है?
दीपक की सोने जैसी लौ ज्ञान, सच्चाई, प्रेम और आशा का प्रतीक हो सकती है। यह ज्ञान और अच्छे विचारों का प्रकाश है, जो पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ता आया है और आगे भी लोगों को सही रास्ता दिखाता रहेगा।
शब्दों के रूप
“कि जिससे अमावस बने पूर्णिमा-सी”
‘अमावस’ का अर्थ है ‘अमावस्या’। इन दोनों शब्दों का अर्थ तो समान है लेकिन इनके लिखने-बोलने में थोड़ा-सा अंतर है। ऐसे ही कुछ शब्द नीचे दिए गए हैं। इनसे मिलते-जुलते दूसरे शब्द कविता से खोजकर लिखिए। ऐसे ही कुछ अन्य शब्द आपस में चर्चा करके खोजिए और लिखिए।
1. दिया ______
2. उजेला ______
3. अनगिन _____
4. ______
5. _____
6. _______
उत्तर:
1. दिया – दीप
2. उजेला – उजाला
3. अनगिन – अनगिनत
4. दिन – दिवस
5. धरा – धरती
6. सिल – शिला
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अर्थ की बात
(क) “जलाते चलो ये दिये स्नेह भर-भर”
इस पंक्ति में ‘चलो’ के स्थान पर ‘रहो’ शब्द रखकर पढ़िए। इस शब्द के बदलने से पंक्ति के अर्थ में क्या अंतर आ रहा है? अपने समूह में चर्चा कीजिए।
(ख) कविता में प्रत्येक शब्द का अपना विशेष महत्व होता है। यदि वे शब्द बदल दिए जाएँ तो कविता का अर्थ भी बदल सकता है और उसकी सुंदरता में भी अंतर आ सकता है।
नीचे कुछ पंक्तियाँ दी गई हैं। पंक्तियों के सामने लगभग समान अर्थों वाले कुछ शब्द दिए गए हैं। आप उनमें से वह शब्द चुनिए, जो उस पंक्ति में सबसे उपयुक्त रहेगा-
प्रश्न 1.बहाते चलो ________ तुम वह निरंतर (नैया, नाव, नौका)
कभी तो तिमिर का _____ मिलेगा। (तट, तीर, किनारा)
उत्तर: नैया, किनारा
प्रश्न 2.रहेगा _____ पर दिया एक भी यदि (धरा, धरती, भूमि)
कभी तो निशा को ______ मिलेगा।। (प्रात:, सुबह, सवेरा)
उत्तर: धरा, सवेरा
प्रश्न 3. जला दीप पहला तुम्हीं ने _____ की (अंधकार, तिमिर, अँधेरे)
चुनौती _____ बार स्वीकार की थी। (प्रथम, अव्वल, पहली)
उत्तर: तिमिर प्रथम
प्रतीक
(क) “कभी तो निशा को सवेरा मिलेगा ”
निशा का अर्थ है— रात।
सवेरा का अर्थ है— सुबह ।
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आपने अनुभव किया होगा कि कविता में इन दोनों शब्दों का प्रयोग ‘रात’ और ”सुबह’ ‘के लिए नहीं किया गया है। अपने समूह में चर्चा करके पता लगाइए कि ‘निशा’ और ‘सवेरा’ का इस कविता में क्या-क्या अर्थ हो सकता है।
(संकेत— निशा से जुड़ा है ‘अँधेरा’ और सवेरे से जुड़ा है ‘उजाला’)
उत्तर:
निशा - सवेरा
अँधेरा - उजाला
बुराई - अच्छाई
अज्ञान - ज्ञान
द्वेष - प्रेम
(ख) कविता में से चुनकर कुछ शब्द नीचे दिए गए हैं। अपने समूह में मिलकर इन पर चर्चा कीजिए और इन्हें उपयुक्त स्थान पर लिखिए।
(ग) अपने समूह में मिलकर ‘निशा’ और ‘सवेरा’ के लिए कुछ और शब्द सोचिए और लिखिए।(संकेत – नीचे दिए गए चित्र देखिए और इन पर विचार कीजिए ।)
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उत्तर: विद्यार्थी अपने शिक्षक या साथियों की मदद से इस पर चर्चा करें।
पंक्ति से पंक्ति
“जला दीप पहला तुम्हीं ने तिमिर की
चुनौती प्रथम बार स्वीकार की थी”
कविता की इस पंक्ति को वाक्य के रूप में इस प्रकार लिख सकते हैं-
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“तुम्हीं ने पहला दीप जला तिमिर की चुनौती प्रथम बार स्वीकार की थी ।
” अब नीचे दी गई पंक्तियों को इसी प्रकार वाक्यों के रूप में लिखिए-
1. बहाते चलो नाव तुम वह निरंतर ।
2. जलाते चलो ये दिये स्नेह भर-भर ।
3. बुझाओ इन्हें, यों न पथ मिल सकेगा।
4. मगर विश्व पर आज क्यों दिवस ही में घिरी आ रही है अमावस निशा-सी।
उत्तर:
1.तुम वह नाव निरंतर बहाते चलो।
2. तुम ये दिये स्नेह से भर-भरकर जलाते चलो।
3. इन्हें बुझाओ, नहीं तो इस प्रकार पथ नहीं मिल सकेगा।
4. मगर आज विश्व पर दिवस के समय ही अमावस की रात-सी क्यों घिरी आ रही है?
सा/सी/से का प्रयोग
“घिरी आ रही है अमावस निशा-सी
स्वर्ण-सी जल रही और जलती रहेगी”
इन पंक्तियों में कुछ शब्दों के नीचे रेखा खिंची है। इनमें ‘सी’ शब्द पर ध्यान दीजिए। यहाँ ‘सी’ शब्द समानता दिखाने के लिए प्रयोग किया गया है। ‘सा/सी/से’ का प्रयोग जब समानता दिखाने के लिए किया जाता है तो इनसे पहले योजक चिह्न (-) का प्रयोग किया जाता है।
अब आप भी विभिन्न शब्दों के साथ ‘सा / सी / से’ का प्रयोग करते हुए अपनी कल्पना से पाँच वाक्य अपनी लेखन-पुस्तिका में लिखिए।
उत्तर:
(क) “रहेगा धरा पर दिया एक भी यदि
कभी तो निशा को सवेरा मिलेगा”
यदि हर व्यक्ति अपना कर्तव्य समझ ले और दूसरों की भलाई के लिए कार्य करे तो पूरी दुनिया सुंदर बन जाएगी। आप भी दूसरों के लिए प्रतिदिन बहुत-से अच्छे कार्य करते होंगे। अपने उन कार्यों के बारे में बताइए ।
(ख) इस कविता में निराश न होने, चुनौतियों का सामना करने और सबके सुख के लिए कार्य करने के लिए प्रेरित किया गया है। यदि आपको अपने किसी मित्र को निराश न होने के लिए प्रेरित करना हो तो आप क्या करेंगे? क्या कहेंगे? अपने समूह में बताइए ।
(ग) क्या आपको कभी किसी ने कोई कार्य करने के लिए प्रेरित किया है? कब? कैसे? उस घटना के बारे में बताइए।
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मैं रोज़ दूसरों की मदद करने की कोशिश करता हूँ। जैसे घर के कामों में माता-पिता की मदद करना, पौधों को पानी देना, जरूरतमंद की सहायता करना, पानी बचाना और अपने दोस्तों की पढ़ाई में मदद करना। हमें छोटे-छोटे अच्छे काम करते रहना चाहिए। इससे दूसरों को खुशी मिलती है।
अगर मेरा कोई मित्र निराश हो, तो मैं उससे बात करूँगा और उसकी परेशानी समझने की कोशिश करूँगा। मैं उसे समझाऊँगा कि मुश्किल समय हमेशा नहीं रहता और मेहनत करते रहने से सफलता मिल सकती है। मैं उसका हौसला बढ़ाऊँगा और जरूरत पड़ने पर उसकी मदद भी करूँगा।
हाँ, एक बार मेरे शिक्षक ने मुझे कठिन काम से घबराने के बजाय लगातार प्रयास करते रहने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने समझाया कि शुरुआत में काम कठिन लग सकता है, लेकिन मेहनत और अभ्यास से उसे पूरा किया जा सकता है। उनकी बात से मेरा आत्मविश्वास बढ़ा और मैंने वह काम पूरा किया।
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अमावस्या और पूर्णिमा
(क) “भले शक्ति विज्ञान में है निहित वह
कि जिससे अमावस बने पूर्णिमा-सी”
आप अमावस्या और पूर्णिमा के बारे में पहले ही पढ़ चुके हैं। क्या आप जानते हैं कि अमावस्या और पूर्णिमा के होने का क्या कारण है?
आप आकाश में रात को चंद्रमा अवश्य देखते होंगे। क्या चंद्रमा प्रतिदिन एक-सा दिखाई देता है? नहीं। चंद्रमा घटता-बढ़ता दिखाई देता है। आइए जानते हैं कि ऐसा कैसे होता है। आप जानते ही हैं कि चंद्रमा पृथ्वी की परिक्रमा करता है जबकि पृथ्वी सूर्य की ।
आप यह भी जानते हैं कि चंद्रमा का अपना कोई प्रकाश नहीं होता। वह सूर्य के प्रकाश से ही चमकता है। लेकिन पृथ्वी के कारण सूर्य के कुछ प्रकाश को चंद्रमा तक जाने में रुकावट आ जाती है। इससे पृथ्वी की छाया चंद्रमा पर पड़ती है, जो प्रतिदिन घटती-बढ़ती रहती है। सूरज का जो प्रकाश बिना रुकावट चंद्रमा तक पहुँच जाता है, उसी से चंद्रमा चमकदार दिखता है। इसी छाया और उजले भाग की आकृति में आने वाले परिवर्तन को चंद्रमा की कला कहते हैं।
चंद्रमा की कला धीरे-धीरे बढ़ती रहती है और पूर्णिमा की रात चंद्रमा पूरा ‘दिखने लगता है। इसके बाद कला धीरे-धीरे घटती रहती है और अमावस्या वाली रात चाँद दिखाई नहीं देता। चंद्रमा की कलाओं के घटने के दिनों को ‘कृष्ण पक्ष’ को कहते हैं। ‘कृष्ण’ शब्द का एक अर्थ काला भी है। इसी प्रकार चंद्रमा की कलाओं के बढ़ने के दिनों को ‘शुक्ल पक्ष’ कहते हैं। ‘शुक्ल’ शब्द का एक अर्थ ‘उजला’ भी है।
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अमावस्या और पूर्णिमा चंद्रमा की दो अलग-अलग अवस्थाएँ हैं। अमावस्या में चंद्रमा दिखाई नहीं देता, जबकि पूर्णिमा में चंद्रमा पूरा और चमकीला दिखाई देता है।
इन दोनों से हमें यह सीख मिलती है कि जीवन में अँधेरा और उजाला दोनों आते रहते हैं। कठिन समय में हमें धैर्य रखना चाहिए और यह विश्वास रखना चाहिए कि कठिनाइयों के बाद अच्छा समय जरूर आता है।
(ख) अब नीचे दिए गए चित्र में अमावस्या, पूर्णिमा, कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष को पहचानिए और ये नाम उपयुक्त स्थानों पर लिखिए—
(यदि पहचानने में कठिनाई हो तो आप अपने शिक्षक, परिजनों या इंटरनेट की सहायता भी ले सकते हैं।)
चित्र में पहचान:
सबसे काले चरण को अमावस्या कहेंगे।
सबसे चमकीले पूर्ण चंद्रमा को पूर्णिमा कहेंगे।
अमावस्या से पूर्णिमा के बीच वाले चरण शुक्ल पक्ष कहलाते हैं।
पूर्णिमा से अमावस्या के बीच वाले चरण कृष्ण पक्ष कहलाते हैं।
आपने तिथिपत्र (कैलेंडर ) अवश्य देखा होगा। उसमें साल के सभी महीनों की तिथियों की जानकारी दी जाती है।
नीचे तिथिपत्र के एक महीने का पृष्ठ दिया गया है। इसे ध्यान से देखिए और प्रश्नों के उत्तर दीजिए—
(क) दिए गए महीने में कुल कितने दिन हैं?
उत्तर: इस महीने में कुल 31 दिन हैं।
(ख) पूर्णिमा और अमावस्या किस दिनाँक और वार को पड़ रही है?
उत्तर:
पूर्णिमा: 6 जनवरी, शुक्रवार।
अमावस्या: 21 जनवरी, शनिवार।
(ग) कृष्ण पक्ष की सप्तमी और शुक्ल पक्ष की सप्तमी में कितने दिनों का अंतर है?त्तर:
उत्तर:
कृष्ण पक्ष की सप्तमी: 14 जनवरी।
शुक्ल पक्ष की सप्तमी: 28 जनवरी।
इन दोनों के बीच 14 दिनों का अंतर है।
(घ) इस महीने में कृष्ण पक्ष में कुल कितने दिन हैं?
उत्तर: कृष्ण पक्ष में कुल 15 दिन होते हैं (7 जनवरी से 21 जनवरी तक)।
(ङ) ‘वसंत पंचमी’ की तिथि बताइए ।
उत्तर: वसंत पंचमी 26 जनवरी, गुरुवार को है।
समय साक्षी है कि जलते हुए दीप
अनगिन तुम्हारे पवन ने बुझाए।
‘पवन’ शब्द का अर्थ है हवा।
नीचे एक अक्षर-जाल दिया गया है। इसमें ‘पवन’ के लिए उपयोग किए जाने वाले अलग-अलग नाम या शब्द छिपे हैं। आपको उन्हें खोजकर उन पर घेरा बनाना है, जैसा एक हमने पहले से बना दिया है। देखते हैं, आप कितने सही नाम या शब्द खोज पाते हैं।
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कविता संबंधित कुछ रचनाएँ दी गई हैं, इन्हें पुस्तक में दिए गए क्यू. आर. कोड की सहायता से पढ़ें, देखें व समझें।
हम सब सुमन एक उपवन के
बढ़े चलो
रोज़ बदलता कैसे चाँद भाग 1
रोज़ बदलता कैसे चाँद भाग 2
इन रचनाओं को पढ़ने से हमें एकता, मिल-जुलकर रहने और आगे बढ़ने की सीख मिलती है। “हम सब सुमन एक उपवन के” में सभी लोगों को एक बगीचे के फूलों जैसा बताया गया है, जो मिलकर सुंदरता बढ़ाते हैं।
“रोज़ बदलता कैसे चाँद” में चंद्रमा के अलग-अलग रूपों के बारे में बताया गया है। इससे हमें प्रकृति के बदलाव और उसके सुंदर चक्र को समझने का अवसर मिलता है।
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